बेमेतरा

बोरिया रंग महोत्सव का भव्य समापन: लोकसंस्कृति की छटा से सराबोर हुआ ग्राम बोरिया


बेमेतरा। बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बोरिया में सतनाम संगम पंथी दल, ग्राम पंचायत एवं समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय “बोरिया रंग महोत्सव” का समापन समारोह हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समापन अवसर पर बेमेतरा विधायक श्री दीपेश साहू मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम में उनके साथ बेला जनपद सरपंच संघ के अध्यक्ष श्री रघुवीर (पिंटू) सिंह, प्रहलाद पप्पू वर्मा पुरुषोत्तम यादव सरपंच बीरेंद्र कुमार टंडन सहित भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता आयोजक गण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
दो दिवसीय इस रंगारंग सांस्कृतिक महोत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिली। लोकगीत, पंथी नृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियाँ एवं लोककलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समूचे वातावरण को उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक गौरव से भर दिया। ग्रामीणों एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया
इस अवसर पर “पंथी कला रत्न सम्मान”, “देवदास बंजारे स्मृति सम्मान”,कला श्री सम्मान “पंथी शिखर सम्मान” तथा “छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान” जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से विभिन्न क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त विभूतियों को अलंकृत किया गया। सम्मान समारोह ने पूरे आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
इस अवसर पर विधायक श्री दीपेश साहू ने अपने संबोधन में कहा कि बोरिया रंग महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति से जुड़ने और अपनी पहचान को संजोने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोककला और परंपराओं से समृद्ध रही है, और ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जब गाँव की चौपाल पर संस्कृति जीवित रहती है, तब समाज में एकता, समरसता और संस्कार भी सुदृढ़ होते हैं। आज बोरिया ने यह सिद्ध कर दिया है कि हमारी लोकसंस्कृति केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत परंपरा है। विधायक श्री साहू ने आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
अपने संबोधन में विधायक श्री दीपेश साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति हमारी आत्मा है, और जो कलाकार अपनी साधना से इसे जीवित रखे हुए हैं, वे समाज के सच्चे धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का सम्मान है।

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