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उद्योग स्थापना हेतु प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई के पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों का घोर विरोध।



  तिल्दा-नेवरा ।  क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक इकाई की स्थापना को लेकर आयोजित की जाने वाली पर्यावरण जनसुनवाई से पहले ही पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों का घोर विरोध सामने आ रहा है। गांव-गांव में इस परियोजना को लेकर असंतोष व्याप्त है और लोग इसे अपने पर्यावरण, स्वास्थ्य और आजीविका के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं। रायपुर जिला तिल्दा जनपद क्षेत्र के ग्राम कोनारी मे प्रस्तावित एस आर एस स्पंज एवं पांवर उद्योग का विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग की स्थापना से क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचेगा, जिसका दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित उद्योग से जल, वायु और भूमि प्रदूषण की आशंका है। क्षेत्र पहले से ही सीमित जल संसाधनों पर निर्भर है और उद्योग की स्थापना से भूजल स्तर में भारी गिरावट आ सकती है। किसानों का कहना है कि यदि जल स्रोत प्रदूषित हुए तो कृषि कार्य प्रभावित होगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाएगी। इसके अलावा पशुपालन करने वाले ग्रामीणों ने भी चारा और स्वच्छ जल की कमी की आशंका जताई है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन और उद्योग प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परियोजना से संबंधित आवश्यक दस्तावेज, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां ग्रामीणों के साथ साझा नहीं की गईं। पंचायत का आरोप है कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति और विश्वास में लिए पर्यावरण जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता निभाने जैसा है। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की राय जानना होता है, न कि पहले से तय निर्णय पर मुहर लगवाना।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने एकजुट होकर कलेक्टर के वास्ते अनुविभागीय अधिकारी तिल्दा  को ज्ञापन  सौंपते हुए कहा है कि क्षेत्र में पूर्व से ही चार स्पंज  आयरन उद्योग संचालित है , जिसके  चलते निस्तारी तालाब का पानी उपयोग करने के योग्य नहीं है। , ग्रामीण  विभिन्न बिमारियों से ग्रसित हो रहे हैं ,उन्होंने कहा है कि प्रस्तावित संयंत्र के समीप स्कूल व आबादी क्षेत्र लगा हुआ है उद्योग लगने से विभिन्न समस्याओं के मध्य ग्रामीणों को गुजर बसर करना होगा । ग्रामीण व पंचायत प्रतिनिधियों ने ,प्रशासन से मांग की है  कि, जनसुनवाई से पहले परियोजना के सभी पहलुओं को सरल भाषा में सार्वजनिक किया जाए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उद्योग से मिलने वाले रोजगार के दावे केवल कागजी हैं, जबकि वास्तविकता में बाहरी लोगों को ही प्राथमिकता दी जाएगी और स्थानीय लोगों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
ग्रामीण महिलाओं ने भी विरोध में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कहा कि प्रदूषण का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। उन्होंने स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और सुरक्षित वातावरण को अपना मौलिक अधिकार बताते हुए उद्योग स्थापना का विरोध किया है।
अंत में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई और जबरन पर्यावरण जनसुनवाई कराई गई, तो वे इसका बहिष्कार करेंगे और आंदोलन को उग्र रूप देंगे। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि विकास के नाम पर पर्यावरण और ग्रामीणों के भविष्य के साथ समझौता न किया जाए, बल्कि स्थानीय जनता की सहमति से ही कोई निर्णय लिया जावे।

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