*बिल्वपत्र की महिमा बिल्व मूल की गरिमा*

श्रीशिवमहापुराण की विद्येश्वरसंहिता, अध्याय 22, श्लोक क्रमांक 22 – 31 में बिल्ववृक्ष की महत्ता का अत्यन्त मार्मिक और विस्तृत वर्णन किया गया है। इस पवित्र ग्रंथ के अनुसार, बिल्व वृक्ष स्वयं भगवान महादेव का स्वरूप है । देवताओं द्वारा इसकी स्तुति की जाती है, क्योंकि यह शिव की साक्षात् प्रतिमूर्ति है। संसार के सभी प्रसिद्ध तीर्थ गङ्गा, यमुना, प्रयाग आदि बिल्ववृक्ष के मूल में ही निवास करते हैं । जो पुण्यात्मा भक्त बिल्व के मूल में लिङ्ग रूपी अविनाशी भगवान शिव की पूजा करता है, वह निश्चित रूप से शिवलोक को प्राप्त कर लेता है । यहाँ पूजा करने से शिव की कृपा प्राप्ति निश्चित है।
बिल्ववृक्ष के मूल में शिवजी के मस्तक पर अभिषेक करने वाला भक्त समस्त तीर्थों में स्नान का फल प्राप्त करता है। वह पृथ्वी पर पूर्णतः पवित्र हो जाता है, क्योंकि बिल्व मूल सभी तीर्थों का मूल स्रोत है। इस मूल में निर्मित उत्तम थाले को जल से परिपूर्ण देखकर भगवान शिव अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। जलाभिषेक से शिव का हृदय आनंदित हो उठता है और भक्त को अपार आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो व्यक्ति गंध, पुष्प, चंदन आदि से बिल्ववृक्ष के मूल का पूजन करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है। इससे उसकी संतान की वृद्धि होती है तथा सुख – समृद्धि की प्राप्ति होती है। पूजन से जीवन में सौभाग्य का वास हो जाता है।
बिल्व मूल में आदरपूर्वक दीपमाला का दान करने वाला व्यक्ति तत्त्वज्ञान से सम्पन्न होकर महादेव के सान्निध्य को प्राप्त करता है। दीपों की ज्योति से अज्ञान का नाश होता है और शिव की निकटता मिलती है।बिल्व शाखा को हाथ से पकड़कर उसके नव पल्लव (नए कोमल पत्ते) ग्रहण कर पूजा करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह विधि भक्त को पापमुक्ति प्रदान करती है। जो पुरुष भक्ति पूर्वक बिल्ववृक्ष के नीचे एक शिवभक्त को भोजन कराता है, उसे करोड़ों मनुष्यों को भोजन कराने का महान पुण्य फल मिलता है। यह छोटा-सा दान अमिट पुण्य प्रदान करता है। विशेष रूप से, बिल्ववृक्ष के नीचे दूध और घी युक्त अन्न शिवभक्त को प्रदान करने से भक्त कभी दरिद्र नहीं रहता । इससे धन-धान्य की वर्षा होती है और जीवन सुखमय हो जाता है। बिल्ववृक्ष शिव पूजा का प्रमुख साधन है। इसके पत्र त्रिलोक्योत्तर शिव को अत्यन्त प्रिय हैं। इसकी महिमा जानकर भक्तों को इसका निरंतर सेवन और पूजन करना चाहिए। ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए बिल्व मूल की आराधना से मोक्ष प्राप्ति निश्चित है । यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि – सच्ची भक्ति सरल विधियों से ही सिद्ध होती है । ॐ नमः शिवाय’
*डॉ. गौतमसिंह पटेल* सालर, सारंगढ़ छग


