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वन मंडल में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का शोषण उजागर



सारंगढ़ ।  वन मंडल अंतर्गत कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों एवं श्रमिकों की समस्याओं को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ ने वन मंडल अधिकारी को पत्र लिखकर वेतन भुगतान, ड्यूटी समय, अवकाश, सुविधाओं एवं मानसिक प्रताड़ना से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।
संघ द्वारा दिए गए पत्र के अनुसार, कर्मचारियों को प्रत्येक माह की 10 तारीख तक वेतन भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। वहीं श्रम नियमों के विपरीत कर्मचारियों से 8 घंटे के बजाय 12 से 24 घंटे तक ड्यूटी कराई जाती है जबकि अतिरिक्त कार्य का भुगतान भी नहीं किया जाता। पत्र में उल्लेख है कि – कई बैरियरों पर लेट-बाथ एवं पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। मजबूरी में श्रमिक बाहर जाने पर अधिकारियों के अचानक निरीक्षण के दौरान उन्हें अनुपस्थित मानते हुए कार्य से पृथक करने की कार्यवाही की जाती है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि – डिपो चौकीदारों का वेतन पिछले 5 माह से लंबित है, जिससे उनके परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। इसके अलावा कर्मचारियों को वन मंडल से बाहर निजी कार्यों के लिए ले जाकर जबरन काम कराया जाना तथा वाहन चालकों से यह कहकर काम लिया जाना कि – दुर्घटना की स्थिति में वही जिम्मेदार होंगे कानून और न्याय दोनों के विरुद्ध बताया गया है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि – कुछ क्षेत्रों में एक ही श्रमिक से 24 घंटे की ड्यूटी ली जा रही है, जबकि प्रधान मुख्य वनसंरक्षक के निर्देश अनुसार केवल 8 घंटे कार्य लिया जाना निर्धारित है । अवकाश मांगने पर श्रमिकों को छुट्टी न देकर दबाव बनाया जाता है। दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ ने मांग की है कि – इन बिंदुओं पर तत्काल सुधारात्मक कार्यवाही की जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 5 दिवस के भीतर मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो संघ को वनमंडल कार्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी । इस पत्र के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।

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