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श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ पंचम दिवस।
जीव संसार में तन से नही मन से बंधा हुआ है – पं अनिल शुक्ला।



सारंगढ़/ बिलाईगढ़ – बिलाईगढ नगर क्षेत्र के धाराशिव रोड पर देवांगन परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस के सत्र में भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीला चरित्र का विशद वर्णन व्यास पीठ से पं अनिल शुक्ला बसहा वाले द्वारा विस्तारित किए गए।
कथा वर्णन करते हुए उन्होने बताया कि भागवत अपनी वाणी को सत्य करते हुए पृथ्वी  के भार को दूर करने में एक पल की भी देरी नही किए भगवान का गोकुल में जन्मोत्सव के बाद ही एक भार पूतना का उद्धार किए तीन माह में शकटासुर का व छः माह में तृणावर्त का उद्धार किए एक वर्ष में भगवान का  नामकरण संस्कार संपादित हुए। आगे माखन चोरी  व ऊखल बंधन लीला चरित्र का भावपूर्ण विश्लेषण सुनाया गया  , ऊखल बंधन के संदर्भ में बताया गया कि  जीव इस संसार में तन से नही बल्कि मन से बंधा रहता है । तन का बंधन कोई बंधन नही जीव के लिए सबसे बड़ा बंधन मन का बंधन है इसी बात को भगवान चरित्रार्थ करते हुए स्वयं ऊखल में अपने तन को बंधवाकर यमलार्जुन वृक्ष बने कुबेर पुत्रों को मुक्त करते है ।
आगे भगवान द्वारा अघासुर बकासुर उद्धार की कथा नाग निग्रह गोवर्धन पूजन व रास लीला चरित्र विस्तार पूर्वक सुनाया गया।
कंस वध से लेकर द्वारिकापुरी गमन की कथा के साथ रूक्मणी मंगल की पावन कथा का वर्णन किया गया।
मुख्य यजमान डाॅ दिवाकर देवांगन द्वारा संकल्पित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ में श्रीकृष्ण रूक्मणी मंगल मे विवाहोत्सव धूमधाम व आनंद उल्लास के मनाया गया।
कथा श्रवण हेतु नित्य प्रति भक्तों की अपार भीड़ उमड रही है  जो कि वहां के वातावरण को परम भक्तिमय व धार्मिक भाव से ओतप्रोत बना रहे ह

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