रायपुर

*प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल*



रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को संवाद ऑडिटोरियम, छत्तीसगढ़ से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की वर्तमान स्थिति, विगत 2 वर्षों की उपलब्धियां, आगामी 3 वर्षों की कार्ययोजना तथा फाइलेरिया उन्मूलन हेतु सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़, आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा सह प्रबंध संचालक सीजीएमएससी, मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़, संचालक, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, छतीसगढ़, संचालक संचालनालय आयुष विभाग, स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि एवं डेवलपमेंट पार्टनर्स उपस्थित रहे।

प्रेसवार्ता के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, नई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, टीबी मुक्त भारत अभियान तथा फाइलेरिया उन्मूलन हेतु सामूहिक दवा सेवन (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) कार्यक्रम को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वय से पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, इन्फ्लूएंजा जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियों तथा आम नागरिकों को किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु ठोस रणनीति पर विचार- विमर्श किया गया। इस अवसर पर जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों एवं निरीक्षण दौरों के माध्यम से व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संकल्प को दोहराया गया।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ शासन का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि रोकथाम, समय पर पहचान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को स्वस्थ जीवन प्रदान करना है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि फाइलेरिया, जिसे आम भाषा में हाथीपाँव कहा जाता है, संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलने वाला रोग है, जो समय के साथ व्यक्ति को आजीवन दिव्यांग बना सकता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण वर्षों बाद दिखाई देते हैं और एक बार रोग हो जाने पर इसका पूर्ण उपचार संभव नहीं है।

हालांकि, फाइलेरिया से बचाव पूरी तरह संभव है। उन्होंने जानकारी दी कि इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 10 फरवरी 2026 से सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर एवं निर्धारित बूथों पर पात्र नागरिकों को अपने सामने निःशुल्क, सुरक्षित फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराएंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से राज्य में 1 करोड़ 58 लाख से अधिक जनसंख्या को दवा सेवन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 10 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक राज्य के कुल 18 जिलों के 65 फाइलेरिया प्रभावित विकासखंडों में सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इनमें से 15 जिलों—रायपुर (शहरी सहित), गरियाबंद, बलौदाबाजार, महासमुंद, बिलासपुर (शहरी सहित), मुंगेली, गौरेला–पेंड्रा–मरवाही, जांजगीर–चांपा, सक्ती, सारंगढ़–बिलाईगढ़, सरगुजा (शहरी सहित), सूरजपुर, जशपुर, बालोद तथा रायगढ़ (शहरी सहित)—में तीन दवाओं (आईवरमेक्टिन, डीईसी एवं एल्बेंडाजोल – आईडीए) के माध्यम से दवा सेवन कराया जाएगा।

वहीं 3 जिलों—बस्तर (जगदलपुर), राजनांदगांव एवं खैरागढ़–छुईखदान–गंडई—में डीईसी एवं एल्बेंडाजोल (डीए) के माध्यम से लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाएं दी जाएंगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के अंतर्गत दी जाने वाली फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने अपील की कि 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर, सभी पात्र नागरिक स्वास्थ्य कर्मियों के सामने दवा का सेवन सुनिश्चित करें। दवाएं खाली पेट नहीं ली जानी हैं।

अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने मीडिया, जनप्रतिनिधियों, पंचायत एवं नगरीय निकायों तथा सामाजिक संगठनों से अपील की कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने मीडिया से सकारात्मक जनजागरूकता एवं जनभागीदारी बढ़ाने में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।

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