
तिल्दा-नेवरा। नगर पालिका परिषद तिल्दा-नेवरा की लापरवाही और गैर-जिम्मेदार कार्यप्रणाली ने पूरे नगर को बदहाली के कगार पर ला खड़ा किया है। नगर के सभी 22 वार्डों में गंदगी का अंबार लगा है, नालियां पूरी तरह जाम हैं,वही पर हालात सुधारने की बजाय नगर पालिका परिषद चुप्पी साधे बैठी हुई है।
नगर के हर कोने से एक ही शिकायत सामने आ रही है—
न महीनों से नालियों की सफाई हुई, न कचरा उठाया गया, न कोई निगरानी। सड़कों, गलियों और बस्तियों में फैली गंदगी अब लोगों के धैर्य की आख़िरी सीमा तोड़ रही है। बदबू, मच्छर और संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है, फिर भी जिम्मेदारों के सर पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका परिषद सिर्फ कागजों में सफाई दिखा रही है, जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है । सफाई कर्मचारियों की मनमानी, निगरानी की कमी और अधिकारियों की उदासीनता ने हालात को और बिगाड़ दिया है।

विकास कार्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। कई जगह अधूरे, घटिया और दिखावटी कार्य नजर आ रहे हैं, फिर भी काम पूरे होने के दावे किए जा रहे हैं। इससे यह सवाल उठना लाज़मी है कि नगर पालिका परिषद आखिर किसके हित में काम कर रही है जनता के या फिर स्वयं के हित साधने में लगे हुए हैं।
नगरवासियों का कहना है कि नगर पालिका परिषद पूरी तरह विफल साबित हो चुकी है। जनता की समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं, जवाबदेही तय नहीं और सुधार की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती। इस मसले पर
लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पूरे नगर में व्यापक सफाई अभियान और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता सड़कों पर उतरकर बड़ा जनआंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी। इधर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब पूरा नगर गंदगी में डूबा है, तब नगर पालिका परिषद आखिर किस सपने में खोयी हुई है ।क्या नगरपालिका शासन बड़ा जन आंदोलन की राह देख रहा है ।


