श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ तृतीय दिवस।
धर्म रक्षा हेतु शास्त्र अनुसरण के साथ शस्त्र संचालन भी आवश्यक है – पं अनिल शुक्ला।

सारंगढ़/ बिलाईगढ़ – पावन नगर बिलाईगढ के धाराशिव रोड पर देवांगन परिवार द्वारा संकल्पित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस के सत्र में व्यास पीठ पर विराजमान सुप्रसिद्ध भागवत प्रवक्ता पं अनिल शुक्ला बसहा वाले द्वारा तृतीय दिवस सत्र की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया।
कथा का आरंभ सृष्टि वर्णन से करते हुए उन्होंने बताया कि ब्रह्म जी द्वारा सबसे पहले मानसिक सृष्टि में सनकादि ऋषियों को प्रगट किए फिर ग्यारह रुद्र व दस श्रेष्ठ ऋषियों को प्रगट किए फिर मानवीय सृष्टि में मनु शतरूपा द्वारा सृष्टि विस्तार की कथा का वाचन किया गया आगे उनके द्वारा मनु वंश में भगवान के अनेक अवतारों का वर्णन सुनाया गया ।
मनु कन्या देवहूति के गर्भ से भगवान कपिल नारायण का जन्म तथा उनके द्वारा प्रतिपादित सांख्ययोग का वर्णन किया गया , यज्ञ नारायण व नर नारायण भगवान के प्राकट्य कथा व्यास पीठ से विस्तारित की गई, नर नारायण भगवान के तपस्या के संदर्भ में आचार्य श्री ने बताया कि धर्म की रक्षा कभी भी एकांकी आयाम से नही हो सकती है सनातन धर्म की रक्षा के लिए शास्त्र के साथ शस्त्र भी आवश्यक है , माला फेरने के साथ भाला फेरना भी आवश्यक है , राम राम की बोली बोलने के साथ साथ धर्म रक्षा हेतु बंदूक से गोली छोड़ना भी आवश्यक होता है तब दोनों आयामो से धर्म की रक्षा होती है।
आगे व्यासपीठ से भक्तराज ध्रुव की कथा का मार्मिक चित्रण किया गया। भगवान पृथुनारायण व ऋषभ नारायण के पावन चरित्र का वर्णन सुनाया गया तथा इसी कड़ी में ऋषभ पुत्र महाराज भरत चरित्र का वर्णन सुनाया गया महराज श्री ने बताया कि अजनाभखंड से भारत वर्ष को प्रगट करने जन्म दाता कोई है तो महाराज भरत ही है उन्ही के नाम से ही यह वर्ष आजतक भारतवर्ष के नाम से सुशोभित हो रही है।
भागवत श्रवण हेतु नित्य भक्तों की भीड उमड़ रही है तथा आयोजक परिवार डाॅ दिवाकर देवांगन जी द्वारा भक्तों के लिए भोजन भंडरे की भावपूर्ण व्यवस्था की गई है।


